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WION investigates Chinas network of fake Twitter accounts | Exclusive: फेक ट्विटर खातों के जरिये भारत विरोधी अभियान चला रहा चीन

नई दिल्ली: अपनी कारगुजारियों के चलते दुनियाभर के निशाने पर आया चीन (China) बड़े पैमाने पर फर्जी और भ्रामक जानकारी फैला रहा है. लद्दाख हिंसा के समय भी उसने ‘फर्जी ट्वीट’ के सहारे दुष्प्रचार किया था. बीजिंग ने अपना प्रोपेगेंडा (Chinese propaganda) फैलाने के लिए बाकायदा एक रणनीति तैयार की है और इसके सहारे कई देशों को निशाना बनाया जा रहा है.

Zee News के सहयोगी चैनल WION ने चीन की इस साजिश का भंडाफोड़ किया है. WION की रिपोर्ट बताती है कि चीन भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए मल्टीमिलियन डॉलर का अभियान (Misinformation Campaign) चला रहा है. पड़ताल में पाया गया कि भारत से सीमा विवाद चरम पर रहने के दौरान चीनी राजनयिकों, चीनी राज्य और चीनी मीडिया द्वारा किये गए कई ट्वीट पहली नजर में वास्तविक लगते हैं, लेकिन वे सभी फर्जी हैं, उन्हें फर्जी अकाउंट से पोस्ट किया गया था.

चार तरह से देता है अंजाम
फर्जी एवं भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए चीन द्वारा मुख्य रूप से चार तरीके अपनाए जाते हैं. पहला, फेक अकाउंट द्वारा, जिसमें कुछ जाने-माने न्यूज प्लेटफॉर्म होने का दिखावा करते हैं. दूसरा, बॉट्स द्वारा, इस तरह से पोस्ट को बूस्ट किया जाता है. तीसरा, स्टेट मीडिया, चीनी मीडिया कम्युनिस्ट सरकार के एजेंडे को बेहद चालाकी के साथ आगे बढ़ाती है. और चौथा है खुद चीनी राजनयिक.

ट्विटर बैन पर फर्जी अकाउंट की भरमार
दिलचस्प बात यह है कि ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चीन में प्रतिबंधित हैं. हालांकि, WION की जांच में पता चला है कि चीनी सरकार के पास कई फर्जी खाते हैं और इनमें से ज्यादातर का इस्तेमाल भारत के खिलाफ भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए किया जा रहा है. 5,000 संदिग्ध फर्जी चीनी ट्विटर अकाउंट्स कोरोना वायरस और हांगकांग विरोध को लेकर भ्रामक जानकारी फैला रहे थे, लेकिन अचानक उन्होंने भारत-चीन सीमा विवाद और चीनी उत्पादों के बहिष्कार से जुड़े अभियानों पर खुद को केंद्रित कर लिया. इन 5,000 संदिग्ध फर्जी खातों में से 1,500 कथित तौर पर पिछले पांच महीनों में और लगभग 1,000 पिछले 12 महीनों में बनाए गए हैं.

चीनी राजनयिकों की भूमिका
पड़ताल में सामने आया कि अमेरिकी सरकार द्वारा वित्त पोषित ब्रॉडकास्टर रेडियो फ्री एशिया का ट्विटर अकाउंट फर्जी है. अकाउंट पर एक पोस्ट है, जिसमें मृत भारतीय सैनिकों की नकली तस्वीर दिखाई गई है – इस तस्वीर जो कई खातों द्वारा शेयर किये गया है. इस पोस्ट के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि चीन किस तरह से भारतीय सेना पर भारी पड़ रहा है. चीनी राजनयिक भी इस भारत विरोधी अभियान में शामिल हैं और WION के पास इसका सबूत भी है. कराची में तैनात चाइनीज काउंसल जनरल के कुछ ट्वीट में सीमा विवाद के लिए भारत को दोषी करार देते हुए कहा गया है कि नई दिल्ली ने वॉशिंगटन के उकसावे के बाद ऐसा किया.

दूसरा नाम है केप टाउन में तैनात चाइनीज काउंसल जनरल लिन जिंग का. एक बार फिर से उन्होंने लद्दाख हिंसा के लिए भारत को दोषी ठहराया है. ये चीनी राजनयिक न केवल कम्युनिस्ट सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं बल्कि उन्होंने कई ऐसे फेक अकाउंट्स को भी फॉलो किया हुआ है, जो भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करते हैं. WION की रिपोर्ट में 7,000 से अधिक फर्जी ट्विटर खातों का चीनी राजनयिकों से संबंध उजागर किया गया है. इसमें चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन का नाम भी शामिल हैं.

राष्ट्रपति के हाथों में कमान?
ऐसे कई फर्जी खाते हैं जिन्हें चीनी राजनयिकों द्वारा फॉलो किया जा रहा है. फेस खातों के इस नेटवर्क का पता भारतीय सैनिकों की फर्जी फोटो शेयर करने से चलता है. एक ही फोटो को लगभग सभी ने शेयर किया है. भ्रामक एवं फर्जी जानकारी फैलाने के इस चीनी ऑपरेशन की कमान निश्चित तौर पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग के हाथों में होगी. क्योंकि बगैर उनकी अनुमति के चीन में कुछ भी संभव नहीं.

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